बेटी ने अपने पिता को टूटी-सी पुरानी साइकिल पर बैठाया और गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा जिले के अपने गांव सिरहुल्ली पहुंची
अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो....एक बेटी अपने पिता का आन-मान- सम्मान होती है। पिता ही उसके पहले हीरो होते हैं। एक बेटी के लिए उसके पिता सिरमौर होते हैं और पिता के लिए भी बेटी उसका आत्मसम्मान होती है। हमारा कुत्सित समाज जहां बेटियों को जन्म लेने से पहले गर्भ में मार डालने की साजिश रचता रहा है, थोड़ी बड़ी हुई नहीं कि उसके बदन को कितनी नजरें घूरने लगती हैं। छोटी-छोटी बच्चियों से अपनी हवस मिटाकर अपने पुरुषत्व होने का परिचय देनेवाला ये पुरुष प्रधान समाज यहीं नहीं रुकता, चंद पैसे के लिए बेटियों को जिंदा जलाकर अपनी परंपरा आज भी कायम रखे हुए है। ऐसे ही कुत्सित समाज में गरीबी का दर्द झेलती एक बेटी के साहस की कहानी को कोरोना ने उजागर किया है। आज उस बेटी की तारीफ दूर बैठी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ने भी की है। बिहार की इस बेटी ने अपने पिता को टूटी-सी पुरानी साइकिल पर बैठाया और गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा जिले के अपने गांव सिरहुल्ली पहुंची। साइकिल पर बैठाकर अपने जन्मदाता को घर तक लेकर आई, इस बेटी का नाम है ज्योति कुमारी...सलाम है तुम्हें। .
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