उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश में सरक हादसे में ५ मजदूरों की मौत
सिर पर गठरी...पांव में छाले...पेट से हारा...प्रवासी बेचारा ये शब्द एक दम सही साबित होते है...
जा रहे थे मंजिल पर...लेकिन मंजिल तो मिली हाँ लेकिन धरती माँ की गोद में जरूर समा गए...जिन सड़कों पर कभी दौड़ा करती थीं गाड़ियां.... वहां अब भूख रेंगती नजर आती है.... जो गरीब दो वक्त की रोटी के जुगाड़ में परदेस गया था.....अब सड़कों पर मारा-मारा फिर रहा है....बेबस-गुमशुम और उदास चेहरा.... कोरोना से ज्यादा भूख से मरने का डर.... आंखों में सिर्फ आंसू.... गरीब मजदूरों को इस बीमारी ने कुछ तरह से अपनी चपेट में ले लिया है कि शायद लाचारी भी लाचार महसूस करने लगी है.... अब इसने पांव में छालों, पैर से बहते खून, सड़क पर बिखरी रोटियों और बच्चों की रोने की आवाज का रूप धारण कर लिया है.... कुछ अभागे तो ऐसे कि बीच सफर में ही दम तोड़ दिया... वायरस ने तो नहीं मारा, भूख और प्यास ने मार दिया..और किसी की सड़क हादसे में जान चली गयी...ऐसा ही एक मामला..मध्यप्रदेश के सागर से सामने आया... जहां मजदूरों को ले जा रहा ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया...ओर हादसे में 5 लोगों की मौत हो गयी... ओर 15 से अधिक मजदूर घायल हो गए... देखिए इस बच्चे की बात को गौर से सुनिए.... ये अपने माँ बाप के लिए रो रहा है...इसको नहीं पता कि इसके मा बाप अब इस दुनिया मे नहीं है.... आब बताइए इस बच्चे का क्या कसूर है.... बेबस, गुमशुम और हर चेहरा उदास... ये वे लोग हैं जो अपने गांवों से आंखों में कुछ सुनहरे सपने लेकर शहरों में आए थे.... मेहनत मजदूरी कर किसी तरह गुजर बसर कर रहे थे... लेकिन लॉकडाउन ने इन्हें सड़क पर ला दिया... जब भूखे पेट नहीं रहा गया तो झोला उठाकर निकल पड़े हैं अपने गांवों की ओर... इन लोगों की पीड़ा को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता... जिससे बात करो यही कहता है... कोरोना का पता नहीं.. भूख जरूर मार डालेगी...भूख न सही तो सड़क हादसे में जान चली जाएगी.... अब कैसे क्या करें...किसके पास जाए... ये बड़ा सवाल है...सरकार तो लाख दावे करती है... लेकिन जमीनी हकीकत तो कुछ और बयां कर रही है ।
सिर पर गठरी...पांव में छाले...पेट से हारा...प्रवासी बेचारा ये शब्द एक दम सही साबित होते है...
जा रहे थे मंजिल पर...लेकिन मंजिल तो मिली हाँ लेकिन धरती माँ की गोद में जरूर समा गए...जिन सड़कों पर कभी दौड़ा करती थीं गाड़ियां.... वहां अब भूख रेंगती नजर आती है.... जो गरीब दो वक्त की रोटी के जुगाड़ में परदेस गया था.....अब सड़कों पर मारा-मारा फिर रहा है....बेबस-गुमशुम और उदास चेहरा.... कोरोना से ज्यादा भूख से मरने का डर.... आंखों में सिर्फ आंसू.... गरीब मजदूरों को इस बीमारी ने कुछ तरह से अपनी चपेट में ले लिया है कि शायद लाचारी भी लाचार महसूस करने लगी है.... अब इसने पांव में छालों, पैर से बहते खून, सड़क पर बिखरी रोटियों और बच्चों की रोने की आवाज का रूप धारण कर लिया है.... कुछ अभागे तो ऐसे कि बीच सफर में ही दम तोड़ दिया... वायरस ने तो नहीं मारा, भूख और प्यास ने मार दिया..और किसी की सड़क हादसे में जान चली गयी...ऐसा ही एक मामला..मध्यप्रदेश के सागर से सामने आया... जहां मजदूरों को ले जा रहा ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया...ओर हादसे में 5 लोगों की मौत हो गयी... ओर 15 से अधिक मजदूर घायल हो गए... देखिए इस बच्चे की बात को गौर से सुनिए.... ये अपने माँ बाप के लिए रो रहा है...इसको नहीं पता कि इसके मा बाप अब इस दुनिया मे नहीं है.... आब बताइए इस बच्चे का क्या कसूर है.... बेबस, गुमशुम और हर चेहरा उदास... ये वे लोग हैं जो अपने गांवों से आंखों में कुछ सुनहरे सपने लेकर शहरों में आए थे.... मेहनत मजदूरी कर किसी तरह गुजर बसर कर रहे थे... लेकिन लॉकडाउन ने इन्हें सड़क पर ला दिया... जब भूखे पेट नहीं रहा गया तो झोला उठाकर निकल पड़े हैं अपने गांवों की ओर... इन लोगों की पीड़ा को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता... जिससे बात करो यही कहता है... कोरोना का पता नहीं.. भूख जरूर मार डालेगी...भूख न सही तो सड़क हादसे में जान चली जाएगी.... अब कैसे क्या करें...किसके पास जाए... ये बड़ा सवाल है...सरकार तो लाख दावे करती है... लेकिन जमीनी हकीकत तो कुछ और बयां कर रही है ।
